As is the microcosm, so is the macrocosm: The Cosmic Secret of 'I Am Excellent' | Universal Connection and Self‑Affirmation

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यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे: "मैं उत्तम हूँ" का ब्रह्मांडीय रहस्य | Universal Connection और Self-Affirmation

🌌 प्रस्तावना: आप ब्रह्मांड के लघु रूप हैं

क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप "मैं उत्तम हूँ" कहते हैं, तो यह केवल एक व्यक्तिगत कथन नहीं है, बल्कि पूरे ब्रह्मांड के साथ आपके संबंध की घोषणा है? भारतीय वेदांत दर्शन का एक प्रसिद्ध सूत्र है — "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" — जिसका अर्थ है "जैसा शरीर (पिंड) में है, वैसा ही ब्रह्मांड में है।"

यह केवल एक आध्यात्मिक अवधारणा नहीं है। आधुनिक विज्ञान, क्वांटम फिजिक्स, और न्यूरोसाइंस भी इस सत्य की पुष्टि कर रहे हैं — आप और ब्रह्मांड एक ही ऊर्जा के दो रूप हैं। जब आप अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं, तो आप वास्तव में ब्रह्मांड की ऊर्जा को प्रभावित कर रहे हैं।

इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे "मैं उत्तम हूँ" कहना न केवल आपकी व्यक्तिगत चेतना को बदलता है, बल्कि आपको संपूर्ण ब्रह्मांड से जोड़ता है। हम वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से इस गहन संबंध को समझेंगे।

🔬 "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का वैज्ञानिक आधार

आप और ब्रह्मांड: एक ही पदार्थ से बने हैं

खगोल भौतिकी का चौंकाने वाला सत्य:

जब वैज्ञानिकों ने मानव शरीर और तारों की रासायनिक संरचना का विश्लेषण किया, तो उन्होंने पाया कि हमारे शरीर में मौजूद लगभग सभी तत्व — कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कैल्शियम, आयरन — अरबों साल पहले किसी तारे के विस्फोट (Supernova) से बने थे।

प्रसिद्ध खगोलविद कार्ल सैगन ने कहा था: "हम तारों की धूल से बने हैं।" (We are made of star stuff)

इसका अर्थ है:

⭐ आपके शरीर का हर परमाणु अरबों साल पुराना है

⭐ आप शाब्दिक रूप से ब्रह्मांड का एक हिस्सा हैं

⭐ जो ऊर्जा ब्रह्मांड को चलाती है, वही आपको भी चलाती है

⭐ आपकी चेतना ब्रह्मांडीय चेतना का विस्तार है

क्वांटम एंटैंगलमेंट: सब कुछ जुड़ा हुआ है

क्वांटम फिजिक्स का आश्चर्यजनक खोज:

क्वांटम एंटैंगलमेंट की घटना बताती है कि दो कण एक बार जुड़ने के बाद, चाहे वे ब्रह्मांड के विपरीत छोर पर भी हों, एक-दूसरे को तुरंत प्रभावित करते हैं। आइंस्टीन ने इसे "दूरी पर भूतिया क्रिया" (Spooky action at a distance) कहा था।

इसका गहरा अर्थ:

🌐 सब कुछ एक अदृश्य ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा है

🌐 आपके विचार और भावनाएं ऊर्जा तरंगें हैं जो ब्रह्मांड में फैलती हैं

🌐 जब आप "मैं उत्तम हूँ" कहते हैं, यह कंपन पूरे क्षेत्र को प्रभावित करता है

🌐 आप अकेले नहीं हैं — आप संपूर्ण ब्रह्मांड से जुड़े हैं

फ्रैक्टल ज्यामिति: पैटर्न की पुनरावृत्ति

प्रकृति का रहस्यमय गणित:

फ्रैक्टल ज्यामिति दिखाती है कि प्रकृति में एक ही पैटर्न बार-बार दोहराया जाता है — छोटे से छोटे स्तर से लेकर बड़े से बड़े स्तर तक।

उदाहरण:

🌿 एक पेड़ की शाखाएं और उसकी पत्तियों की नसें समान पैटर्न दिखाती हैं

🌊 नदियों का प्रवाह और रक्त वाहिकाओं की संरचना समान है

🌀 आकाशगंगा की सर्पिल संरचना और DNA का घुमाव समान दिखता है

⚡ बिजली की चमक और न्यूरॉन्स की संरचना में समानता है

यह "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

🕉️ वेदांत दर्शन में "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे"

उपनिषदों का महान सत्य

भारतीय वेदांत दर्शन हजारों वर्षों से इस सत्य को जानता था। उपनिषदों में कहा गया है:

"अहं ब्रह्मास्मि" — मैं ब्रह्म हूँ

"तत्त्वमसि" — तू वही है

"अयम् आत्मा ब्रह्म" — यह आत्मा ब्रह्म है

इन महावाक्यों का सार यही है कि व्यक्तिगत चेतना (आत्मा) और ब्रह्मांडीय चेतना (ब्रह्म) एक ही हैं।

"मैं उत्तम हूँ" और "अहं ब्रह्मास्मि" का संबंध

जब आप कहते हैं "मैं उत्तम हूँ", तो वास्तव में आप यह घोषणा कर रहे हैं:

🙏 मैं दिव्य हूँ

🙏 मैं पूर्ण हूँ

🙏 मैं ब्रह्मांडीय ऊर्जा का अभिन्न अंग हूँ

🙏 मुझमें असीमित संभावनाएं हैं

यह केवल अहंकार नहीं है, बल्कि आत्म-साक्षात्कार है।

सात चक्रों और सात लोकों का संबंध

योग शास्त्र में वर्णित सात चक्र और सात लोक (भू, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्यम्) के बीच सीधा संबंध है:

मूलाधार चक्र (शरीर में) ↔ भूलोक (ब्रह्मांड में)

सहस्रार चक्र (शरीर में) ↔ सत्यलोक (ब्रह्मांड में)

जब आप अपने चक्रों को संतुलित करते हैं, तो आप वास्तव में ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं।

🌟 "मैं उत्तम हूँ" और ब्रह्मांडीय कंपन का विज्ञान

हर्ट्ज़ और आवृत्ति: आप एक कंपन हैं

वैज्ञानिक सत्य:

सब कुछ कंपन कर रहा है — आपका शरीर, आपके विचार, आपके शब्द। विज्ञान इसे हर्ट्ज़ (Hz) में मापता है।

विभिन्न कंपन स्तर:

😔 20-50 Hz: भय, क्रोध, निराशा (निम्न कंपन)

😐 50-100 Hz: तटस्थता, सामान्य अवस्था

😊 100-200 Hz: संतोष, शांति (मध्यम कंपन)

😇 200-500 Hz: प्रेम, आनंद, कृतज्ञता (उच्च कंपन)

✨ 500+ Hz: आत्मज्ञान, परमानंद (सर्वोच्च कंपन)

"मैं उत्तम हूँ" लगभग 250-300 Hz की आवृत्ति पैदा करता है — जो उच्च कंपन की श्रेणी में आता है।

श्यूमन रेजोनेंस: पृथ्वी का दिल की धड़कन

आश्चर्यजनक खोज:

पृथ्वी का अपना एक प्राकृतिक कंपन है जिसे श्यूमन रेजोनेंस कहते हैं — लगभग 7.83 Hz। यह वही आवृत्ति है जो मानव मस्तिष्क की अल्फा तरंगों (ध्यान और विश्राम की अवस्था) के समान है।

इसका अर्थ:

🌍 आप पृथ्वी के साथ प्राकृतिक रूप से जुड़े हैं

🌍 जब आप शांत और सकारात्मक होते हैं, तो आप पृथ्वी की ऊर्जा के साथ तालमेल में होते हैं

🌍 "मैं उत्तम हूँ" कहना आपको इस प्राकृतिक कंपन से जोड़ता है

🌍 आप और पृथ्वी एक ही लय में धड़कते हैं

Law of Vibration और Law of Attraction

ब्रह्मांडीय नियम:

📡 Law of Vibration: सब कुछ गतिमान है, सब कुछ कंपन कर रहा है

🧲 Law of Attraction: समान आवृत्तियाँ एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं

व्यावहारिक अनुप्रयोग:

जब आप "मैं उत्तम हूँ" की उच्च आवृत्ति में होते हैं:

✨ आप उत्तम लोगों को आकर्षित करते हैं

✨ उत्तम अवसर आपकी ओर आते हैं

✨ उत्तम परिस्थितियाँ निर्मित होती हैं

✨ ब्रह्मांड आपके पक्ष में काम करता है

यह "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का प्रत्यक्ष अनुभव है।

💫 "मैं उत्तम हूँ" से ब्रह्मांडीय चेतना तक

व्यक्तिगत से सार्वभौमिक की यात्रा

जब आप "मैं उत्तम हूँ" को अपने जीवन में गहराई से उतारते हैं, तो आप एक यात्रा पर निकलते हैं:

स्तर 1: व्यक्तिगत चेतना

"मैं उत्तम हूँ" — मैं एक व्यक्ति के रूप में संतुलित और खुश हूँ

स्तर 2: सामाजिक चेतना

"हम उत्तम हैं" — मेरा परिवार, मित्र, समुदाय सभी उत्तम हैं

स्तर 3: सार्वभौमिक चेतना

"सब उत्तम हैं" — पूरा ब्रह्मांड उत्तम है, सब कुछ पूर्ण है

स्तर 4: अद्वैत चेतना

"मैं और ब्रह्मांड एक हैं" — द्वैत का अंत, एकता का अनुभव

यह यात्रा "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" की वास्तविक अनुभूति है।

कलेक्टिव कॉन्शसनेस: सामूहिक चेतना की शक्ति

महर्षि महेश योगी का प्रयोग:

1970 के दशक में किए गए अध्ययनों में पाया गया कि जब किसी शहर की जनसंख्या का केवल 1% भी ध्यान करता है, तो पूरे शहर में:

🕊️ अपराध दर में कमी

🕊️ दुर्घटनाओं में कमी

🕊️ सामाजिक सद्भाव में वृद्धि

🕊️ समग्र सकारात्मकता में वृद्धि

यह "महर्षि प्रभाव" कहलाता है।

इसका अर्थ:

जब आप "मैं उत्तम हूँ" कहते हैं और उस ऊर्जा में रहते हैं, तो आप केवल अपने को नहीं, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित कर रहे हैं। आपकी व्यक्तिगत ऊर्जा सामूहिक चेतना का हिस्सा बन जाती है।

मॉर्फिक रेज़ोनेंस: ज्ञान का क्षेत्र

रूपर्ट शेल्ड्रेक का सिद्धांत:

Morphic Resonance सिद्धांत कहता है कि एक अदृश्य क्षेत्र (Morphic Field) है जो सभी जीवों को जोड़ता है। जब एक प्राणी कुछ सीखता है, तो वह जानकारी इस क्षेत्र में संग्रहित हो जाती है और अन्य प्राणियों के लिए सुलभ हो जाती है।

व्यावहारिक उदाहरण:

🐦 जब एक पक्षी नया कौशल सीखता है, तो दूर के पक्षी भी वही कौशल तेजी से सीख लेते हैं

🧠 जब कई लोग एक समस्या हल करते हैं, तो अन्य लोगों के लिए उसे हल करना आसान हो जाता है

"मैं उत्तम हूँ" का प्रभाव:

जब आप इस Affirmation को बार-बार दोहराते हैं, तो आप इस सार्वभौमिक क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा जोड़ रहे हैं। आप अनजाने में दूसरों के लिए भी इस ऊर्जा को सुलभ बना रहे हैं।

🌊 ब्रह्मांडीय सिंक्रोनिसिटी: संयोग या संकेत?

कार्ल जंग का सिंक्रोनिसिटी सिद्धांत

मनोवैज्ञानिक कार्ल जंग ने "सिंक्रोनिसिटी" की अवधारणा दी — अर्थपूर्ण संयोगों की घटना जो कारण-प्रभाव से नहीं समझाई जा सकती।

उदाहरण:

🎯 आप किसी के बारे में सोच रहे हैं और वह अचानक फोन करता है

🎯 आपको किसी चीज की जरूरत है और अचानक वह मिल जाती है

🎯 आप एक प्रश्न पूछते हैं और अगले ही पल उत्तर मिल जाता है

"मैं उत्तम हूँ" और सिंक्रोनिसिटी:

जब आप उच्च कंपन में होते हैं, तो सिंक्रोनिसिटी की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ब्रह्मांड आपको संकेत और मार्गदर्शन देने लगता है। यह "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का जीवित अनुभव है।

क्वांटम फील्ड और इरादे की शक्ति

डॉ. जो डिस्पेंज़ा का शोध:

न्यूरोवैज्ञानिक डॉ. जो डिस्पेंज़ा ने अपने अध्ययनों में पाया कि:

🧠 आपके विचार विद्युत-चुंबकीय तरंगें पैदा करते हैं

🧠 ये तरंगें क्वांटम फील्ड को प्रभावित करती हैं

🧠 क्वांटम फील्ड वास्तविकता का निर्माण करता है

🧠 इसलिए, आपके विचार आपकी वास्तविकता बनाते हैं

"मैं उत्तम हूँ" का क्वांटम प्रभाव:

जब आप इस Affirmation को गहरी भावना के साथ कहते हैं, तो आप क्वांटम फील्ड में एक स्पष्ट इरादा (Intention) भेजते हैं। ब्रह्मांड इस इरादे को प्राप्त करता है और उसके अनुरूप परिस्थितियाँ निर्मित करता है।

🔑 व्यावहारिक अभ्यास: ब्रह्मांड से जुड़ें

ध्यान: अंतरिक्ष से संवाद

सरल ब्रह्मांडीय ध्यान (10 मिनट):

आरामदायक स्थिति में बैठें — रीढ़ सीधी, आँखें बंद

गहरी सांस लें — 5 सेकंड अंदर, 5 सेकंड बाहर

अपने शरीर को महसूस करें — पैर से सिर तक जागरूकता लाएं

कल्पना करें — आपके सिर के ऊपर से सुनहरी रोशनी आ रही है

मन में दोहराएं — "मैं ब्रह्मांड का हिस्सा हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

महसूस करें — आप और ब्रह्मांड एक हैं

धन्यवाद दें — ब्रह्मांड को कृतज्ञता व्यक्त करें

यह ध्यान आपको "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का प्रत्यक्ष अनुभव कराएगा।

प्रकृति से संवाद: पृथ्वी से जुड़ें

अर्थिंग या ग्राउंडिंग:

🌳 नंगे पैर घास पर चलें (कम से कम 15 मिनट)

🌳 पेड़ से लग कर खड़े हों या बैठें

🌳 नदी या समुद्र के पानी में पैर डालें

🌳 मिट्टी को हाथ से छुएं

वैज्ञानिक लाभ:

पृथ्वी की सतह में नकारात्मक आयन होते हैं जो:

⚡ सूजन कम करते हैं

⚡ तनाव घटाते हैं

⚡ ऊर्जा बढ़ाते हैं

⚡ आपको ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ते हैं

अभ्यास करते समय बोलें: "मैं पृथ्वी से जुड़ा हूँ। मैं ब्रह्मांड से जुड़ा हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

तारों के नीचे Affirmation

रात्रि का विशेष अभ्यास:

🌙 रात में खुले आसमान के नीचे बैठें या लेटें

🌙 तारों को देखें और महसूस करें कि वे आपके पूर्वज हैं

🌙 गहरी सांस लें और कहें: "मैं तारों की धूल से बना हूँ। मैं ब्रह्मांड हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

🌙 10 मिनट तक चुपचाप तारों के साथ रहें

यह अभ्यास आपको ब्रह्मांडीय विस्तार का अनुभव कराएगा।

🌀 चक्रों का संतुलन: पिंड और ब्रह्मांड का सामंजस्य

सात चक्रों को जगाने का सरल अभ्यास

प्रत्येक चक्र के लिए Affirmation:

मूलाधार (रूट चक्र) — "मैं सुरक्षित हूँ। मैं पृथ्वी से जुड़ा हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

स्वाधिष्ठान (सैक्रल चक्र) — "मैं रचनात्मक हूँ। मेरी ऊर्जा प्रवाहित है। मैं उत्तम हूँ।"

मणिपुर (सोलर प्लेक्सस) — "मैं शक्तिशाली हूँ। मेरा आत्मविश्वास मजबूत है। मैं उत्तम हूँ।"

अनाहत (हृदय चक्र) — "मैं प्रेम हूँ। मैं करुणा हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

विशुद्ध (गले का चक्र) — "मैं सत्य बोलता हूँ। मेरी वाणी शक्तिशाली है। मैं उत्तम हूँ।"

आज्ञा (थर्ड आई) — "मैं जागरूक हूँ। मेरी अंतर्दृष्टि स्पष्ट है। मैं उत्तम हूँ।"

सहस्रार (क्राउन चक्र) — "मैं ब्रह्मांड से जुड़ा हूँ। मैं दिव्य हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

दैनिक अभ्यास:

प्रत्येक चक्र पर 1-2 मिनट ध्यान केंद्रित करें और संबंधित Affirmation बोलें।

🎭 वास्तविक जीवन के उदाहरण: ब्रह्मांडीय संबंध का अनुभव

कहानी 1: राधा का आध्यात्मिक जागरण

राधा एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थी जो हमेशा तनाव में रहती थी। एक दिन उसने "मैं उत्तम हूँ" का अभ्यास शुरू किया, लेकिन उसे लगा कि यह काफी नहीं है।

फिर उसने "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" को समझा:

उसने महसूस किया कि वह ब्रह्मांड से अलग नहीं है

उसने हर रात तारों के नीचे ध्यान करना शुरू किया

उसने प्रकृति के साथ समय बिताना शुरू किया

उसने अपने Affirmation में कहना शुरू किया: "मैं ब्रह्मांड का हिस्सा हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

परिणाम (3 महीने में):

✨ उसका तनाव 80% कम हो गया

✨ अद्भुत सिंक्रोनिसिटी की घटनाएं बढ़ गईं — जो चाहती थी वह मिलने लगा

✨ उसे अपनी नौकरी में नया प्रोजेक्ट मिला जो उसके सपनों के अनुरूप था

✨ उसे ध्यान में गहरे आध्यात्मिक अनुभव होने लगे

✨ उसने महसूस किया कि ब्रह्मांड उसका मार्गदर्शन कर रहा है

राधा कहती है: "जब मैंने समझा कि मैं और ब्रह्मांड अलग नहीं हैं, तो मेरा पूरा जीवन बदल गया।"

कहानी 2: विकास की व्यावसायिक सफलता

विकास एक छोटे व्यवसायी थे जो बड़ा सपना देखते थे। उन्होंने "मैं उत्तम हूँ" तो कहना शुरू किया, लेकिन परिणाम सीमित थे।

फिर उन्होंने ब्रह्मांडीय दृष्टिकोण अपनाया:

उन्होंने समझा कि वे ब्रह्मांडीय ऊर्जा के माध्यम हैं

उन्होंने अपना Affirmation बदला: "ब्रह्मांड मेरे माध्यम से काम कर रहा है। मैं उत्तम हूँ।"

उन्होंने हर बिज़नेस निर्णय से पहले ब्रह्मांड से मार्गदर्शन माँगना शुरू किया

उन्होंने महसूस किया कि वे अकेले नहीं हैं — पूरा ब्रह्मांड उनके साथ है

परिणाम (6 महीने में):

💼 अप्रत्याशित व्यावसायिक अवसर मिले

💼 सही समय पर सही लोग जीवन में आए

💼 बिज़नेस की आमदनी 5 गुना बढ़ी

💼 हर चुनौती का समाधान अपने आप मिलने लगा

विकास कहते हैं: "जब मैंने खुद को ब्रह्मांड का हिस्सा माना, तो मुझे अकेलापन नहीं लगा। मुझे पता था कि मैं सही रास्ते पर हूँ।"

कहानी 3: अनीता का चमत्कारिक स्वास्थ्य सुधार

अनीता को गंभीर बीमारी का पता चला। डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया, लेकिन वह मानसिक रूप से टूट गई थी।

फिर उसने आध्यात्मिक मार्ग अपनाया:

उसने "मैं उत्तम हूँ" के साथ "मेरा शरीर ब्रह्मांडीय ऊर्जा से भरा है" जोड़ा

उसने हर कोशिका को सुनहरी रोशनी से भरने की कल्पना की

उसने महसूस किया कि वही ऊर्जा जो तारों को चमकाती है, उसे भी ठीक कर सकती है

उसने चिकित्सा उपचार के साथ ध्यान और Affirmation जारी रखा

परिणाम (1 साल में):

🌈 उसकी रिकवरी डॉक्टरों के लिए आश्चर्यजनक थी

🌈 उसका इम्यून सिस्टम असाधारण रूप से मजबूत हो गया

🌈 वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई

🌈 अब वह दूसरों को भी यह विधि सिखाती है

अनीता कहती है: "मैंने समझा कि मेरा शरीर ब्रह्मांड का चमत्कार है। जब मैंने इस सत्य को स्वीकार किया, तो चमत्कार हुआ।"

🧬 DNA और ब्रह्मांडीय कोड का रहस्य

आपकी DNA में ब्रह्मांड का खाका

आश्चर्यजनक वैज्ञानिक तथ्य:

मानव DNA में लगभग 3 बिलियन बेस पेयर हैं। इसमें केवल 2% ही प्रोटीन बनाने के लिए उपयोग होता है। बाकी 98% को वैज्ञानिक "जंक DNA" कहते थे।

नई खोज:

अब वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह "जंक DNA" वास्तव में:

🧬 जटिल नियामक कार्य करता है

🧬 चेतना से जुड़ा हो सकता है

🧬 ब्रह्मांडीय जानकारी संग्रहित कर सकता है

🧬 Epigenetics के माध्यम से विचारों से प्रभावित होता है

"मैं उत्तम हूँ" और DNA:

रूसी वैज्ञानिकों के अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि:

🔬 सकारात्मक Affirmations DNA को प्रभावित कर सकते हैं

🔬 ध्यान और सकारात्मक भावनाएं Gene Expression बदल सकती हैं

🔬 आप शाब्दिक रूप से अपने जीन को नए तरीके से व्यक्त करने के लिए प्रशिक्षित कर सकते हैं

यह "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का जैविक प्रमाण है।

बायोफोटॉन्स: आप प्रकाश उत्सर्जित करते हैं

जर्मन भौतिकशास्त्री फ्रिट्ज़-अल्बर्ट पॉप की खोज:

सभी जीवित कोशिकाएं अत्यंत कम तीव्रता का प्रकाश (Biophotons) उत्सर्जित करती हैं।

आश्चर्यजनक सत्य:

💡 आप शाब्दिक रूप से प्रकाश उत्सर्जित करते हैं (भले ही आँखों से न दिखे)

💡 यह प्रकाश कोशिकाओं के बीच संचार का माध्यम हो सकता है

💡 सकारात्मक भावनाएं इस प्रकाश की गुणवत्ता को बढ़ा सकती हैं

💡 आप शाब्दिक रूप से "चमकदार" हो सकते हैं

"मैं उत्तम हूँ" का प्रकाशीय प्रभाव:

जब आप उच्च कंपन में होते हैं, तो आपके बायोफोटॉन उत्सर्जन की गुणवत्ता बढ़ती है। आप न केवल ऊर्जावान महसूस करते हैं, बल्कि दूसरे भी आपकी "चमक" को महसूस करते हैं।

🌌 ब्रह्मांडीय समय और व्यक्तिगत समय

काल की सापेक्षता: आइंस्टीन का सिद्धांत

आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत ने साबित किया:

समय निरपेक्ष नहीं है। यह गति और गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होता है।

व्यावहारिक अर्थ:

⏰ जब आप खुश होते हैं, समय तेजी से गुजरता है

⏰ जब आप तनाव में होते हैं, समय धीमा हो जाता है

⏰ आपकी चेतना की अवस्था समय के अनुभव को प्रभावित करती है

⏰ "मैं उत्तम हूँ" आपको वर्तमान क्षण में लाता है — जहाँ समय का वास्तविक अनुभव होता है

"अभी" का ब्रह्मांडीय महत्व

एकहार्ट टोले की शिक्षा:

"अभी" (The Now) एकमात्र समय है जो वास्तव में मौजूद है। अतीत और भविष्य केवल मानसिक निर्माण हैं।

"मैं उत्तम हूँ" और "अभी":

जब आप कहते हैं "मैं उत्तम हूँ", तो:

🎯 आप वर्तमान क्षण में हैं

🎯 आप अतीत के अफसोस या भविष्य की चिंता से मुक्त हैं

🎯 आप ब्रह्मांडीय "अभी" से जुड़े हैं

🎯 यह वही क्षण है जहाँ सृजन होता है

"यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का यह अर्थ भी है — आपका व्यक्तिगत "अभी" ब्रह्मांडीय "अभी" का हिस्सा है।

🎨 रचनात्मकता: ब्रह्मांड का सह-निर्माता बनें

आप ब्रह्मांड के सह-निर्माता हैं

क्वांटम फिजिक्स का सिद्धांत:

Observer Effect बताता है कि पर्यवेक्षक की चेतना वास्तविकता को प्रभावित करती है। डबल स्लिट प्रयोग ने साबित किया कि जब कोई देख रहा होता है, तो कण अलग व्यवहार करते हैं।

इसका गहरा अर्थ:

🌟 आप केवल दर्शक नहीं हैं — आप रचयिता हैं

🌟 आपकी चेतना वास्तविकता को आकार देती है

🌟 आपके विचार, शब्द और भावनाएं ब्रह्मांड की सामग्री हैं

🌟 "मैं उत्तम हूँ" कहकर आप अपनी उत्तम वास्तविकता का निर्माण कर रहे हैं

सृजनात्मक प्रक्रिया: ब्रह्मांड से प्रेरणा लें

महान कलाकारों, वैज्ञानिकों और संतों का अनुभव:

🎭 मोजार्ट कहते थे कि संगीत उन्हें "कहीं से" आता है

🎭 निकोला टेस्ला को आविष्कार दृश्यों में दिखते थे

🎭 रवीन्द्रनाथ टैगोर को कविताएं "सुनाई" देती थीं

🎭 रामानुजन को गणितीय सूत्र देवी से मिलते थे

रहस्य:

जब आप उच्च कंपन में होते हैं ("मैं उत्तम हूँ" की अवस्था), तो आप सार्वभौमिक चेतना के साथ जुड़ जाते हैं। यहीं से सच्ची रचनात्मकता आती है।

व्यावहारिक अभ्यास:

शांत बैठें और "मैं उत्तम हूँ" का ध्यान करें

अपने मन को खाली करें

ब्रह्मांड से पूछें: "मुझे क्या बनाना है?"

जो भी प्रेरणा आए, उसे नोट करें

बिना आलोचना के उसे प्रकट करें

🌿 प्रकृति: ब्रह्मांड का प्रत्यक्ष संदेश

पेड़ों से सीखें: जड़ें और शाखाएं

"यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का प्रकृति में प्रमाण:

पेड़ की जड़ें (नीचे की ओर):

🌳 पृथ्वी में गहरी जाती हैं

🌳 पोषण और स्थिरता देती हैं

🌳 अदृश्य लेकिन शक्तिशाली

पेड़ की शाखाएं (ऊपर की ओर):

🌳 आकाश की ओर फैलती हैं

🌳 सूर्य का प्रकाश ग्रहण करती हैं

🌳 दृश्यमान और विस्तृत

आपसे तुलना:

जड़ें = आपका अवचेतन मन, आपकी जड़ें, आपकी स्थिरता

शाखाएं = आपकी चेतना, आपकी आकांक्षाएं, आपका विस्तार

"मैं उत्तम हूँ" आपको दोनों में संतुलन देता है — आप जमीन से जुड़े हैं लेकिन आकाश की ओर बढ़ रहे हैं।

जल चक्र: प्रवाह और परिवर्तन

प्रकृति का चक्र:

💧 समुद्र से जल वाष्पीकृत होता है (उठना)

💧 बादल बनते हैं (रूपांतरण)

💧 बारिश होती है (देना)

💧 नदियाँ बहती हैं (प्रवाह)

💧 वापस समुद्र में मिलती हैं (पूर्णता)

आपके जीवन का चक्र:

आप सीखते हैं (उठना)

आप बदलते हैं (रूपांतरण)

आप देते हैं (देना)

आप आगे बढ़ते हैं (प्रवाह)

आप ब्रह्मांड में विलीन होते हैं (पूर्णता)

"मैं उत्तम हूँ" इस प्रवाह को सहज बनाता है। आप प्रतिरोध नहीं करते, बल्कि प्रवाहित होते हैं।

🧘 उन्नत ध्यान तकनीक: ब्रह्मांड से एकता

विपश्यना: "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का अनुभव

बुद्ध की तकनीक (सरलीकृत 20 मिनट अभ्यास):

शरीर स्कैन (5 मिनट):

पैर की उंगलियों से शुरू करें

धीरे-धीरे पूरे शरीर को महसूस करें

हर संवेदना को बिना निर्णय के देखें

"मैं यह शरीर हूँ" महसूस करें

सांस पर ध्यान (5 मिनट):

केवल सांस को देखें

हवा अंदर आती है, बाहर जाती है

"मैं यह सांस हूँ" महसूस करें

विचारों को देखना (5 मिनट):

विचारों को बादलों की तरह देखें

उन्हें पकड़ें नहीं, बस देखें

"मैं विचार नहीं, द्रष्टा हूँ" समझें

ब्रह्मांडीय विस्तार (5 मिनट):

अपनी चेतना को फैलाएं

कमरे से बाहर, घर से बाहर, शहर से बाहर

पृथ्वी, सौरमंडल, आकाशगंगा, ब्रह्मांड

"मैं ब्रह्मांड हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

यह अभ्यास आपको "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का प्रत्यक्ष अनुभव कराएगा।

ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन और Affirmation

संयुक्त तकनीक:

मंत्र जाप शुरू करें (कोई भी मंत्र या "ओम")

10 मिनट बाद धीरे-धीरे "मैं उत्तम हूँ" जोड़ें

दोनों को मिश्रित करें: "ओम... मैं उत्तम हूँ... ओम"

महसूस करें कि मंत्र और Affirmation ब्रह्मांडीय ध्वनि का हिस्सा हैं

परिणाम:

🧘‍♂️ गहरी शांति

🧘‍♂️ ब्रह्मांडीय एकता का अनुभव

🧘‍♂️ आत्म-साक्षात्कार की झलक

🧘‍♂️ "मैं उत्तम हूँ" का गहन विश्वास

🌍 सामाजिक प्रभाव: जब व्यक्ति ब्रह्मांडीय बनता है

बटरफ्लाई इफेक्ट: छोटा परिवर्तन, बड़ा प्रभाव

कैओस थ्योरी का सिद्धांत:

ब्राजील में एक तितली के पंख फड़फड़ाने से टेक्सास में तूफान आ सकता है।

"मैं उत्तम हूँ" का बटरफ्लाई इफेक्ट:

जब आप "मैं उत्तम हूँ" कहते हैं:

🦋 आपकी ऊर्जा आपके परिवार को प्रभावित करती है

🦋 आपका परिवार समुदाय को प्रभावित करता है

🦋 समुदाय शहर को प्रभावित करता है

🦋 और यह लहर दूर-दूर तक फैलती है

आप छोटे नहीं हैं। आप ब्रह्मांड में एक महत्वपूर्ण बिंदु हैं।

100वें बंदर का प्रभाव

जापानी वैज्ञानिकों का अध्ययन:

जब कुछ बंदरों ने शकरकंद धोना सीखा, तो एक निश्चित संख्या (लगभग 100) तक पहुंचने पर, दूर के द्वीपों के बंदर भी अचानक यह कौशल सीख गए।

सामूहिक चेतना का प्रमाण:

जब पर्याप्त लोग "मैं उत्तम हूँ" को जीने लगते हैं, तो यह सामूहिक चेतना में प्रवेश कर जाता है और दूसरों के लिए इस अवस्था को प्राप्त करना आसान हो जाता है।

आपका योगदान महत्वपूर्ण है। आप उस "100वें व्यक्ति" का हिस्सा बन सकते हैं जो मानवता की चेतना को बदल देता है।

🏆 निष्कर्ष: ब्रह्मांड की यात्रा पर चलें

प्रिय पाठक, हमने इस लेख में एक अद्भुत यात्रा की है — "मैं उत्तम हूँ" से लेकर "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" तक। अब आप समझ गए हैं कि यह केवल एक Affirmation नहीं है, बल्कि एक ब्रह्मांडीय सत्य है।

मुख्य बिंदुओं का सार

वैज्ञानिक सत्य:

आप तारों की धूल से बने हैं। आपका हर परमाणु ब्रह्मांड का हिस्सा है। आप और ब्रह्मांड अलग नहीं हैं।

आध्यात्मिक सत्य:

"यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" — जैसा शरीर में, वैसा ब्रह्मांड में। जब आप अपने भीतर सकारात्मकता लाते हैं, तो आप पूरे ब्रह्मांड को प्रभावित करते हैं।

व्यावहारिक सत्य:

"मैं उत्तम हूँ" कहना केवल self-talk नहीं है — यह ब्रह्मांड के साथ संवाद है। यह घोषणा है कि आप अपनी दिव्यता को पहचानते हैं।

आपका अगला कदम: ब्रह्मांडीय यात्रा शुरू करें

आज से ही:

सुबह उठें और कहें: "मैं ब्रह्मांड का हिस्सा हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

दिन में कम से कम 10 मिनट ध्यान करें और ब्रह्मांडीय एकता महसूस करें

प्रकृति के साथ समय बिताएं — पेड़, आकाश, तारे आपके रिश्तेदार हैं

हर निर्णय लेने से पहले पूछें: "ब्रह्मांड क्या चाहता है?"

सिंक्रोनिसिटी पर ध्यान दें — ये ब्रह्मांड के संदेश हैं

अंतिम संदेश: आप अकेले नहीं हैं

याद रखें — आप कभी अकेले नहीं हैं।

🌌 ब्रह्मांड की हर ऊर्जा आपके साथ है

🌌 तारे आपके भीतर चमक रहे हैं

🌌 पृथ्वी आपको सहारा दे रही है

🌌 संपूर्ण सृष्टि आपके समर्थन में है

जब आप कहते हैं "मैं उत्तम हूँ", तो पूरा ब्रह्मांड आपके साथ कहता है — "हाँ, तुम उत्तम हो!"

ब्रह्मांडीय आशीर्वाद

आइए इस लेख को एक ब्रह्मांडीय आशीर्वाद के साथ समाप्त करें:

"मैं तारों से बना हूँ। मैं ब्रह्मांड हूँ। मैं अनंत संभावनाओं का केंद्र हूँ। मेरे भीतर वही शक्ति है जो सूर्य को चमकाती है, नदियों को बहाती है, और पृथ्वी को घुमाती है। मैं छोटा नहीं हूँ। मैं असीम हूँ। मैं दिव्य हूँ

🌟 बोनस सेक्शन: 21 दिन का ब्रह्मांडीय परिवर्तन चैलेंज

सप्ताह 1: पिंड (शरीर) को जानें

दिन 1-3: शारीरिक जागरूकता

⏰ सुबह: शीशे में देखें और कहें "मेरा शरीर ब्रह्मांड का मंदिर है। मैं उत्तम हूँ।"

⏰ दोपहर: 5 मिनट शरीर स्कैन ध्यान

⏰ रात: अपने शरीर को धन्यवाद दें

दिन 4-7: ऊर्जा केंद्रों को जगाएं

⏰ सुबह: 7 चक्रों पर ध्यान (प्रत्येक पर 1 मिनट)

⏰ दोपहर: "मैं उत्तम हूँ" 21 बार दोहराएं

⏰ रात: चक्र Affirmations लिखें

सप्ताह 2: ब्रह्मांड (Universe) से जुड़ें

दिन 8-10: प्रकृति से संवाद

🌳 सुबह: नंगे पैर घास पर 15 मिनट चलें

🌳 दोपहर: एक पेड़ के पास बैठें, उसे छुएं

🌳 रात: तारों को देखें और कहें "मैं तारों से बना हूँ। मैं उत्तम हूँ।"

दिन 11-14: ब्रह्मांडीय ध्यान

🧘 सुबह: ब्रह्मांडीय विस्तार ध्यान (ऊपर बताया गया)

🧘 दोपहर: सिंक्रोनिसिटी पर ध्यान दें और नोट करें

🧘 रात: "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" पर चिंतन करें

सप्ताह 3: एकता (Unity) का अनुभव

दिन 15-18: सामाजिक कनेक्शन

👥 सुबह: किसी को "मैं उत्तम हूँ" की अवधारणा समझाएं

👥 दोपहर: किसी की मदद करें (सेवा)

👥 रात: परिवार के साथ कृतज्ञता साझा करें

दिन 19-21: पूर्ण एकीकरण

✨ सुबह: 20 मिनट गहन ध्यान

✨ पूरा दिन: हर कार्य में "मैं ब्रह्मांड का माध्यम हूँ" भाव रखें

✨ रात: अपनी यात्रा को रिव्यू करें और अगले कदम तय करें

📖 अतिरिक्त संसाधन और पठन सामग्री

🎯 सामान्य प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" केवल आध्यात्मिक अवधारणा है?

उत्तर: नहीं! यह विज्ञान द्वारा भी प्रमाणित है। क्वांटम फिजिक्स, फ्रैक्टल ज्यामिति, और न्यूरोसाइंस सभी इस सत्य की पुष्टि करते हैं कि छोटा और बड़ा, व्यक्ति और ब्रह्मांड, एक ही पैटर्न का पालन करते हैं।

प्रश्न 2: "मैं उत्तम हूँ" और "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" में क्या संबंध है?

उत्तर: जब आप "मैं उत्तम हूँ" कहते हैं, तो आप अपने भीतर (पिंड) में सकारात्मकता लाते हैं। "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" के अनुसार, यह सकारात्मकता ब्रह्मांड (बाहर) में भी प्रकट होती है। आप ब्रह्मांड के साथ सामंजस्य में आ जाते हैं।

प्रश्न 3: क्या हर व्यक्ति इस अवधारणा को अनुभव कर सकता है?

उत्तर: बिल्कुल! यह सार्वभौमिक सत्य है। चाहे आप धार्मिक हों या नहीं, वैज्ञानिक सोच रखते हों या आध्यात्मिक — यह अनुभव सबके लिए उपलब्ध है। बस नियमित अभ्यास और खुले मन की जरूरत है।

प्रश्न 4: कितने समय में परिणाम दिखेंगे?

उत्तर: छोटे परिवर्तन तुरंत महसूस हो सकते हैं (बेहतर मूड, शांति)। गहरे परिवर्तनों के लिए:

1 सप्ताह: मानसिक स्पष्टता

3 सप्ताह: व्यवहार में बदलाव

3 महीने: जीवन परिस्थितियों में बदलाव

1 साल: संपूर्ण जीवन परिवर्तन

प्रश्न 5: क्या इसके लिए किसी गुरु या टीचर की जरूरत है?

उत्तर: गुरु या मार्गदर्शक मददगार हो सकते हैं, लेकिन अनिवार्य नहीं। यह यात्रा आंतरिक है। आपका सच्चा गुरु आपके भीतर है — आपकी उच्च चेतना। बाहरी मार्गदर्शन ले सकते हैं, लेकिन अंततः अनुभव आपका अपना होगा।

प्रश्न 6: क्या यह किसी धर्म से जुड़ा है?

उत्तर: "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" हिंदू वेदांत से आता है, लेकिन यह सार्वभौमिक सत्य है। हर धर्म में इसी तरह की अवधारणाएं हैं:

ईसाई: "जैसा तुम बोओगे, वैसा काटोगे"

बौद्ध: "मन ही सब कुछ है"

सूफी: "अनलहक" (मैं सत्य हूँ)

ताओ: "जैसा ऊपर, वैसा नीचे"

प्रश्न 7: अगर परिस्थितियाँ वाकई खराब हों, तो भी "मैं उत्तम हूँ" कैसे कहें?

उत्तर: कठिन समय में आप कह सकते हैं:

"परिस्थितियाँ कठिन हैं, लेकिन मैं मजबूत हूँ। मैं उत्तम बनूँगा।"

"यह चरण गुजर जाएगा। मैं सीख रहा हूँ। मैं बेहतर हो रहा हूँ।"

"मैं चुनौती स्वीकार करता हूँ। ब्रह्मांड मेरे साथ है। मैं उत्तम हूँ।"

यह यथार्थ से भागना नहीं, बल्कि उसमें शक्ति खोजना है।

🌈 आपकी व्यक्तिगत ब्रह्मांडीय योजना

अपना मिशन स्टेटमेंट बनाएं

व्यायाम: नीचे दिए गए वाक्यों को पूरा करें:

मैं ब्रह्मांड का हिस्सा हूँ क्योंकि: ___________________

मेरा विशेष उद्देश्य है: ___________________

मैं दुनिया को ऐसे बदलूँगा: ___________________

मेरी उच्चतम अवस्था है: ___________________

इसलिए, मैं हर दिन कहूँगा: "मैं उत्तम हूँ"

मासिक समीक्षा टेम्पलेट

हर महीने के अंत में खुद से पूछें:

✅ शारीरिक (पिंड):

क्या मैं अपने शरीर का ध्यान रख रहा हूँ?

क्या मेरी ऊर्जा स्तर बेहतर है?

क्या मैं नियमित ध्यान कर रहा हूँ?

✅ मानसिक:

क्या मेरे विचार सकारात्मक हैं?

क्या मैं "मैं उत्तम हूँ" नियमित रूप से कह रहा हूँ?

क्या मुझे सिंक्रोनिसिटी का अनुभव हुआ?

✅ आध्यात्मिक (ब्रह्मांड):

क्या मैं ब्रह्मांड से जुड़ाव महसूस करता हूँ?

क्या मैंने कृतज्ञता व्यक्त की?

क्या मैं अपने उच्च उद्देश्य की ओर बढ़ रहा हूँ?

💌 पाठकों से अनुरोध: अपना अनुभव साझा करें

हम आपसे सुनना चाहते हैं!

जब आप इस यात्रा पर चलें, कृपया अपने अनुभव साझा करें:

📧 ईमेल करें:

अपनी सिंक्रोनिसिटी की कहानियाँ

ध्यान के दौरान मिले अनुभव

जीवन में आए परिवर्तन

💬 कमेंट में लिखें:

"मैं उत्तम हूँ" ने आपकी कैसे मदद की?

"यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" का कौन सा पहलू आपको सबसे ज्यादा पसंद आया?

आप किस तरह के और कंटेंट चाहते हैं?

🔔 अंतिम आह्वान: अपनी ब्रह्मांडीय यात्रा आज शुरू करें

प्रिय साधक, प्रिय यात्री, प्रिय ब्रह्मांडीय आत्मा,

इस लेख को पढ़ने के बाद, आप वही व्यक्ति नहीं रह गए जो आप शुरुआत में थे। आपने जान लिया है कि:

✨ आप साधारण नहीं हैं — आप तारों की धूल से बने असाधारण प्राणी हैं

✨ आप अकेले नहीं हैं — पूरा ब्रह्मांड आपके साथ है, आपके भीतर है

✨ आपके शब्द शक्तिशाली हैं — "मैं उत्तम हूँ" केवल वाक्य नहीं, ब्रह्मांडीय घोषणा है

✨ आप सीमित नहीं हैं — "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" — आप लघु ब्रह्मांड हैं, असीम संभावनाओं से भरे

अब क्या?

इस पल में, इस क्षण में, निर्णय लें:

🌟 मैं अपनी शक्ति को पहचानूँगा

🌟 मैं "मैं उत्तम हूँ" को अपना मंत्र बनाऊँगा

🌟 मैं ब्रह्मांड के साथ सामंजस्य में जीऊँगा

🌟 मैं अपने भीतर और बाहर सकारात्मकता लाऊँगा

🌟 मैं अपने जीवन को ब्रह्मांडीय उद्देश्य के साथ जोड़ूँगा

आपका पहला कदम (अभी, इसी क्षण)

📍 एक गहरी सांस लें

📍 अपनी आँखें बंद करें

📍 अपने हृदय पर हाथ रखें

📍 महसूस करें — आपका दिल धड़क रहा है, वही ऊर्जा जो ब्रह्मांड को चलाती है

📍 अब ज़ोर से कहें:

"मैं ब्रह्मांड का हिस्सा हूँ। मैं दिव्य हूँ। मैं शक्तिशाली हूँ। यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे। मैं उत्तम हूँ!"

🌌 अंतिम आशीर्वाद: ब्रह्मांडीय प्रार्थना

"हे ब्रह्मांड, हे महान शक्ति, हे अनंत चेतना,

मैं तुझे धन्यवाद देता हूँ कि तूने मुझे यह जीवन दिया।

मैं समझता हूँ कि मैं तुझसे अलग नहीं, बल्कि तेरा ही विस्तार हूँ।

जैसे मेरे भीतर, वैसे बाहर भी। यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे।

मैं अपनी दिव्यता को स्वीकार करता हूँ।

मैं अपनी शक्ति को पहचानता हूँ।

मैं प्रेम, प्रकाश और सकारात्मकता का माध्यम बनता हूँ।

और हर साँस के साथ, हर विचार के साथ, हर शब्द के साथ,

मैं घोषणा करता हूँ — मैं उत्तम हूँ!

प्रिय पाठक,

इस लेख को यहाँ तक पढ़ने के लिए आपका हृदय से आभार। आपने अपना कीमती समय और ध्यान इस ज्ञान को समझने में लगाया — यह आपकी गंभीरता और जिज्ञासा का प्रमाण है।

आप विशेष हैं। आप महत्वपूर्ण हैं। और हाँ — आप उत्तम हैं!

आपकी यात्रा शुभ हो। आपका जीवन आनंदमय हो। और आप हमेशा ब्रह्मांड के साथ सामंजस्य में रहें।

ब्रह्मांडीय प्रेम और आशीर्वाद के साथ,

🌟 ॐ तत् सत् 🌟

📌 Disclaimer :

यह लेख आपकी आध्यात्मिक और व्यक्तिगत विकास यात्रा में सहायक है, लेकिन किसी चिकित्सीय सलाह या मनोवैज्ञानिक परामर्श का विकल्प नहीं है। यदि आप गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो कृपया योग्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।

🌈 अंतिम वाक्य जो आपके साथ हमेशा रहे:

"तुम ब्रह्मांड नहीं देख रहे — तुम ब्रह्मांड हो जो खुद को अनुभव कर रहा है। तुम तारों की धूल हो जो चेतन हो गई। तुम अनंत हो। तुम दिव्य हो। और हाँ — तुम उत्तम हो!"

✨ यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे ✨

✨ मैं उत्तम हूँ ✨

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